उत्तराखंड कांग्रेस में खटपट, विधायकों के निशाने पर इंदिरा हृदयेश

देहरादून : पूर्व विधायकों के साथ 29 फरवरी को खटीमा में बैठक कर आगे की रणनीति तय करेंगे।
इसके बाद वे पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से भी मुलाकात करेंगे। आगामी तीन मार्च से गैरसैंण में शुरू हो रहे बजट सत्र से पहले कांग्रेस में अंदरखाने सुलग रही असंतोष की आग के निशाने पर इंदिरा हृदयेश बताई जा रही हैं। अगले विधानसभा चुनाव के लिए वक्त घटने के साथ प्रदेश में कांग्रेस में अंदरखाने भी बेचैनी बढ़ रही है। सत्ता वापसी को छटपटा रही पार्टी किसी भी सूरत में सरकार के खिलाफ नरम नहीं दिखना चाहती। इस वजह से सरकार के खिलाफ आक्रामक तेवर अपनाने के हिमायती विधायकों के एक धड़े के निशाने पर नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश हैं।
ये धड़ा अपने साथ कुल 11 में से सात-आठ विधायकों के होने का दावा करता रहा है। तमाम मौजूं मुद्दों पर सरकार को कठघरे में खड़ा करने में जुटे इन विधायकों का मानना है कि पार्टी मौजूदा समय में सदन के भीतर मित्र विपक्ष की तरह बर्ताव कर रही है। वरिष्ठ विधायक गोविंद सिंह कुंजवाल और हरीश धामी भी गाहे-बगाहे अपने असंतोष को जाहिर करते रहे हैं।
विधानसभा में उपनेता प्रतिपक्ष करन माहरा ने विधायकों व पूर्व विधायकों की 29 फरवरी को प्रस्तावित बैठक की पुष्टि की। उन्होंने कहा कि सरकार के खिलाफ जनता में रोष बढ़ रहा है। ऐसे में पार्टी पर जन अपेक्षाओं को पूरा करने का दबाव है। कांग्रेस को मजबूत विपक्ष की भूमिका निभानी होगी। विधानसभा सत्र के दौरान सदन में पार्टी मुखर दिखे, इसके लिए रणनीति तैयार की जाएगी। वर्तमान में पार्टी का रवैया संतोषजनक नहीं माना जा सकता।
उन्होंने कहा कि विधायकों एवं पूर्व विधायकों की उक्त बैठक में भविष्य की रणनीति पर मंथन होगा। इसके बाद पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से भी मुलाकात की जाएगी। सूत्रों की मानें तो बैठक में नेता प्रतिपक्ष पर निशाना साधा जाना तय है। उन्हें हटाने पर जोर दिया जाएगा या नहीं, इसे लेकर भी बैठक में फैसला लेने की बात कही जा रही है।गैरसैंण में छोटे बजट सत्र को लेकर सरकार कांग्रेस के निशाने पर है। बजट सत्र तीन मार्च से सात मार्च यानी पांच दिन होना है। उपनेता प्रतिपक्ष करन माहरा ने बजट सत्र छोटा रखने पर तीखी आपत्ति की है। उन्होंने कहा कि पड़ोसी उत्तरप्रदेश में 13 फरवरी से शुरू हुआ बजट सत्र 17 मार्च तक होना है। वहां एक माह से ज्यादा दिनों तक सत्र रखा गया है। वहीं, उत्तराखंड में इसे महज पांच दिनों में निपटाया जा रहा है। राज्यपाल अभिभाषण और बजट अभिभाषण पर चर्चा साथ-साथ होगी। सत्र कम से कम 20 दिन का होना चाहिए। उन्होंने सत्र सोमवार से आहूत नहीं किए जाने पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सोमवार मुख्यमंत्री का दिवस होता है, लेकिन लंबे समय से सोमवार से सत्र आहूत नहीं किया जा रहा है।

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