उत्तराखंड कैबिनेट का फैसला, हिंदू आईएएस ही होगा चारधाम श्राइन बोर्ड का सीईओ

चारधाम श्राइन बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) के पद पर उसी सचिव रैंक के आईएएस/आईपीएस को नियुक्त किया जा सकता है, जो हिंदु धर्म का अनुयायी होगा। उपाध्यक्ष पद पर भी संस्कृति एवं धर्मस्व विभाग का मंत्री होगा।
अगर वो हिंदू नहीं है तो मुख्यमंत्री किसी भी हिंदू धर्म के अनुयायी मंत्री को उपाध्यक्ष बना सकते हैं। मंदिरों में पुजारी, न्यासी, तीथ पुरोहितों और पंडे एवं संबंधित हक हकूकधारियों के मौजूदा देय दस्तूरात व अधिकार भी यथावत रहेंगे।

प्रदेश मंत्रिमंडल की बैठक में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की अध्यक्षता में हुई बैठक में श्राइन प्रबंधन विधेयक 2019 के प्रारूप में संशोधन किया गया। उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार बैठक में संशोधन प्रारूप पेश किया गया। इसके तहत बोर्ड का गठन, कार्य और शक्तियां को विधेयक में शामिल किया गया है।

इसके तहत सीईओ और उपाध्यक्ष के पद पर होनी वाली नियुक्त केवल हिंदू धर्म के व्यक्ति के साथ पुजारी पंडों के दस्तूर रुप को यथावत रखने का फैसला लिया गया। हक हकूकधारियों एवं पुजारी/न्यासी/तीथ पुरोहित/पंडे आदि के वर्तमान प्रचलित देय अधिकार को विधेयक में समावेश करने का निर्णय लिया गया है। वहीं, मंत्रिमंडल में सात प्रस्ताव आए, जिसमें से चार को मंजूरी मिल गई है।
रिवर राफ्टिंग और क्याकिंग से हटाई अधिकतम आयु सीमा
प्रदेश मंत्रिमंडल ने उत्तराखंड रिवर राफ्टिंग और क्याकिंग नियमावली 2019 में संशोधन किया है। प्रदेश में राफ्टिंग के लिए अधिकतम आयु सीमा 65 वर्ष और न्यूनतम 12 वर्ष थी।

संशोधन के बाद अधिकतम आयु सीमा समाप्त कर दी गई है। इसी तरह क्याकिंग के लिए न्यूनतम 18 वर्ष और अधिकतम 50 वर्ष आयु सीमा थी, जिसे अब न्यूनतम 12 वर्ष और अधिकतम कोई सीमा नहीं रखी गई है।

अन्य प्रमुख फैसले

  • प्रदेश के स्वैच्छिक/राजकीय गृहों में रहने वाले अनाथ बच्चों को राजकीय सेवाओं में 5 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण दिए जाने के लिए नियमावली मंजूर।
  • पशुपालन बीमा योजना के तहत अधिक पशुओं को किया जाएगा शामिल।
  • पशुपालन विभाग में पशुलोक संवर्ग को गढ़वाल संवर्ग में किया शामिल। लेखा एवं अशुलिपिक संवर्ग सेवानियमावली से बाहर।
    हरिद्वार जिले में नहीं खुलेगी पशुवधशाला, आएगा कानून
    प्रदेश सरकार हरिद्वार जिले में पशुवधशाला (स्लॉटर हाउस) नहीं खोलने को लेकर जल्द कानून लाएगी। सूत्रों के अनुसार मंत्रिमंडल की बैठक में मंगलौर विधानसभा क्षेत्र में पशुवधशाला के विरोध पर चर्चा हुई। हरिद्वार में साधु संत धरने पर बैठ गए हैं, जबिक भाजपा के कई विधायक विरोध कर रहे हैं।

यह स्थिति इसलिए भी गंभीर है कि वर्ष 2021 में हरिद्वार महाकुंभ होना है। ऐसे में बढ़ते विरोध के साथ न्यायालय में इस मामले के विचाराधीन होने से सरकार पशोपेश में है। तय किया गया है कि अब सरकार जनपद को पशुवधशाला निर्माण से ही बाहर रखने के लिए कानून लाकर मसले का हल निकालेगी।

हरिद्वार के मंगलौर में पशुवधशाला खोलने की अनुमति पिछली सरकार ने दी थी। भाजपा सरकार के कार्यकाल में निर्माण की प्रक्रिया शुरू होते ही विरोध के सुर उठने लगे। पार्टी के भीतर लक्सर विधायक संजय गुप्ता ने इसके विरोध की शुरुआत की। प्रदेश में पशुवधशालाएं खोलने का मामला न्यायालय में चला गया। शहरी विकास मंत्री और हरिद्वार विधायक मदन कौशिक भी इसके पक्ष में नहीं थे।

तीन दिन पहले संत समाज धरने पर बैठे तो विधायक संजय गुप्ता और स्वामी यतिश्वरानंद मुख्यमंत्री और शहरी विकास मंत्री से मिले। महाकुंभ नजदीक होने और बढ़ते विरोध को लेकर मंत्रिमंडल ने मसले पर मंथन किया। इसके बाद सैद्धांतिक सहमति बनी कि सरकार हरिद्वार जनपद को पशुवधशाला खोलने से बाहर रखने के लिए कानून लाएगी।

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