हरिद्वार कुंभ-महाकुंभ

आजाद पत्रकार न्यूज नेटवर्क। प्रमोद मिश्रा की विशेष रिपोर्ट।

हरिद्वार कुंभ महापर्व महाकुंभ पर्व विक्रम संवत 22021-2078 सन 2021 इ. कुंभ महापर्व की उत्पत्ति के संबंध में स्कंद पुराण में वर्णन है। देवों और दानवों में अमृत प्राप्ति के लिए समुंद्र मंथन किया ।अमृत कुंभ हाथों में लिए धनवंतरी भगवान समुंद्र से हाथ में अमृत कलश लिए हुए प्रकट हुए। उन्होंने वह अमृत कुंभ देवताओं को समर्पित किया ।देवता और दानव चाहते थे कि वे अमृत पीकर अमर और अजय हो जाएं ।दोनों में अमृत के लिए विवाद होने लगा। मोहिनी रूप धारी भगवान विष्णु ने मध्यस्थता कर अमृत कुंभ इंद्र के पुत्र जयंत को सौप दिया ।उनकी रक्षा का भार सूर्य, चंद्र ,बृहस्पति और शनि को दिया गया। देवताओं का संकेत पाकर जयंत कलश लेकर भागा। दैत्यो ने उनका पीछा किया ।हरिद्वार प्रयाग उज्जैन और त्रंबकेश्वर (नासिक )इन चार स्थानों पर अमृत कलश की बूंदें गिरने से वहां कुंभ पर्व माना गया ।जिस समय योग में अमृत कुंभ इन चारों स्थानों पर रखा गया था, उसी युग में वही कुंभ पर्व माने गए यह कुंभ पर्व 12 वर्ष पर पड़ता है। हरिद्वार के मायापुर क्षेत्र में कुंभ पर्व का अपूर्व महात्मय शास्त्रों में वर्णित है। स्कंद पुराण के केदारखंड में इस तथ्य का उल्लेख है कि जिस समय बृहस्पति कुंभ राशि पर सूर्य मेष राशि हो उस समय गंगापुर हरिद्वार में कुंभ पर्व का योग होता है ।

इस योग में यहां स्नान करने से मनुष्य जन्म मरण के बंधन से मुक्त हो जाता है। प्रथम शाही स्नान महाशिवरात्रि फालगुन कृष्ण त्रयोदशी गुरुवार 11 मार्च 2021 दितीय शाही स्नान सोमवती अमावस्या चैत्र अमावस्या सोमवार दिनांक 12 अप्रैल 2021 तृतीय शाही स्नान मैथ संक्रांति चैत्र शुक्ल दोज बुधवार दिनांक 14 अप्रैल चतुर्थ शाही स्नान चैत्र पूर्णिमा हनुमान जयंती मंगलवार दिनांक 27 अप्रैल 2021 11 मार्च को शाही स्नान और भी महत्वपूर्ण बन गया भगवान शिव की धरा पर महाशिवरात्रि और कुंभ का प्रथम शाही स्नान साधु संतों के लिए ऐसा प्रतीत हो रहा है था जैसे ईश्वर कोई वरदान रूप में साधु संतों को उपहार में यह दिन सौंपा हो सभी अखाड़ों से आए हुए साधु संत हर्षोल्लास में नजर आए और बैंड बाजे नाच गानों के साथ शाही स्नान को शाही अंदाज में रथों घोड़ों पर सवार होकर माता गंगा घाट पर हर की पौड़ी पर पहुंचे उत्तराखंड के प्रशासन ने साधु संतों का भरपूर सहयोग यात्रा में किया कि किसी भी संत साधु को किसी प्रकार की परेशानी या दिक्कत ना हो इस बात का पूरा ध्यान रखा गया उत्तराखंड के प्रशासन ने पूरी मुस्तैदी से अपनी ड्यूटी को निभाया और शाही स्नान को बिना कोई विरोधाभास से साधु संतों की यात्रा पूर्ण की किसी भी अखाड़ों में आपस में टकराव ना हो इसलिए उन सभी अखाड़ों को समय समय के अनुसार यात्रा निकालने की अनुमति दी गई और साधु-संतों ने प्रशासन शासन का कानून का पालन करते हुए नियमों को अपनाया और उनके बताए हुए समय पर अपनी यात्राओं को। हर हर महादेव हर हर गंगे बम बम भोले के जयघोष लगे आम यात्रियों ने भी कुंभ स्नान का आनंद लिया

तपोनिधी श्री आनंद अखाड़ा पंचायती श्री महंत कालू गिरी अध्यक्ष बालक नाथ मंदिर प्रबंध समिति व राष्ट्रीय सचिव तपो निधि श्री आनंद अखाड़ा पंचायती
फ़ोटो- परमोद मिश्रा

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