व्यापारी वर्ग एवं शिक्षण संस्थानों की आवाज़ सीधे शासन तक पहुंचा रहा है ‘आज़ाद पत्रकार’

आजाद पत्रकार न्यूज़ नेटवर्क, बरेली। एक लंबे समय से नोटबंदी और जी.एस.टी से प्रभावित व्यापार वैसे ही दुश्वारियों और परेशानियों से गुज़र रहा था, कोरोना एवम् लॉकडॉउन के बाद तो व्यापारी वर्ग एवं शिक्षण संस्थान बुरी तरह से प्रभावित हैं। ऐसे में न तो उनकी कोई आवाज़ उठाने वाला है न ही कोई किसी प्रकार की राहत ही शासन से प्राप्त हुई है। गरीबों के लिए राशन एवं नगद धनराशि की तो घोषणाएं होती रही हैं लेकिन देश और समाज में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने एवं सरकार को सर्वाधिक राजस्व देने वाला व्यापारी आज त्रस्त है, उनकी परेशानी सुनने और समझने वाला आज कोई नहीं है। अभी पूरी तरह बाज़ार खुला भी नहीं, बाज़ार में ग्राहक आए भी नहीं कि दुकानदारों के ऊपर खर्चे और देनदारी हावी हो गई है, दुकानों का किराया, कर्मचारियों का वेतन, बिजली के बिल और अन्य खर्चों ने उनकी कमर तोड़ दी है।

यही नहीं कॉरोना के चलते उनके उपर लागू पाबंदी जैसे दुकानों पर सैनिटाइजर आदि की व्यवस्था के साथ अन्य नए खर्चे भी करने पड़ रहे हैं। नगर के सबसे पुराने और प्रतिष्ठित संस्थान श्याम लाल विश्वंभरनाथ के संजय खण्डेलवाल का कहना है कि सरकारी निर्देशानुसार हम मिष्ठान आदि खरीद कर दुकान पर ही खाने वालों को माना करते हैं जिससे ग्राहक काफ़ी कम हो गए हैं, इसके विपरित पूरे शहर की सड़कों पर जगह जगह फल एवम् अन्य सामान के ठेले और वहां खड़े ग्राहक खुलेआम जाम लगा रहे हैं साथ ही किसी भी निर्देश- मास्क, सनेटाइजर और सोशल डिस्टेंस आदि का पालन भी नहीं करते और उनपर कार्यवाही करने वाला कोई नहीं है।

दुकानों के अलग अलग दिन कभी ट्रेड के और कभी दिशा के हिसाब से होने के कारण भी ग्राहक दिग्भ्रमित हो रहे हैं। लॉकडाउन के समय सब कुछ बन्द होने के बावजूद बिजली का पूरा बिल आने की वजह से व्यापारियों में बेहद रोष है। और उनकी मांग है कि हर हाल में इसमें छूट दी जाए, साथ ही हर जी. एस. टी. देने वाले व्यापारी को और भी छूटे प्रदान करके इस सदी की सबसे भयंकर इस आपदा में कुछ राहत दी जाए।
आज़ाद पत्रकार समाचार पत्र व्यापारी वर्ग की इस मांग को प्रमुख सचिव, ऊर्जा सचिव, ऊर्जा मंत्री मुख्यमंत्री के संज्ञान में लाते हुए यह मांग करता है कि व्यापारी वर्ग एवम् शिक्षा संस्थानों के बिजली बिल एवम् अन्य छूट सम्बन्धी इस मामले पर सहानभूति पूर्ण शीघ्र ही विचार करें।

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