कोरोना वायरस: क्या शराब की चाहत, लॉकडाउन-4 को दावत है ?

भारत सरकार की तरफ़ से होने वाले प्रेस कॉन्फ्रेंस में आप रोज़ाना इस तरह की बातें सुनते हैं. इस तरह की बात सुनते ही आपके मन में चाहे अनचाहे एक तस्वीर उभरती है कि भारत में कोरोना काल में स्थिति बेहतर है.

लेकिन क्या आपने भी कभी सोचा है कि जब सब इतना ही अच्छा है

  • तो लॉकडाउन 3 की जरूरत क्यों पड़ी?
  • आज बहुत क्षेत्रों में हमें छूट मिल रही है, तो क्या लॉकडाउन 4 की ज़रूरत भारत में होगी?
  • भारत में 10 लाख टेस्ट होने के बाद भी जानकार क्यों टेस्ट बढ़ाने की मांग कर रहे हैं?
  • सरकार के आँकड़ों पर कैसे और क्यों भरोसा करें?

बीबीसी ने हर भारतीय के मन में उठने वाले परस्पर विरोधी सवालों को सरकार के सामने रखा.

हमने बात की डॉ. वीके पॉल से, जो नीति आयोग के सदस्य हैं और कोविड19 के लिए देश में बनी एम्पावर्ड कमेटी1 को हेड कर रहे हैं.

इस कमेटी का काम कोविड19 मेडिकल इमरजेंसी के लिए मैनेजमेंट प्लान तैयार करना है, केंद्र सरकार के सामने आने वाली चुनौतियों को देखते हुए अगली रणनीति तैयार करना, सरकार को परामर्श देना.

पेशे से डॉक्टर, वीके पॉल एम्स के पीडिएट्रिक्स डिपार्टमेंट में बतौर फ़ैकेल्टी 30 से अधिक सालों से जुड़े रहे हैं. भारत सरकार के पोषण और आयुष्मान भारत योजना में भी इनका योगदान रहा है.

इसके साथ ही ये नीति आयोग के हेल्थ विभाग को लीड करते हैं. उन्होंने 2017 में नीति आयोग ज्वाइन किया है.

तो बीबीसी ने भी सबसे पहले उनसे यही पूछा. आख़िर हर दिन इतनी पॉज़िटिव न्यूज़ सरकार हर पल देती है, तो लॉकडाउन3 की ज़रूरत क्यों पड़ी?

इसके जवाब में डॉ. पॉल कहते हैं, “लॉकडाउन 3 को हमें लॉकडाउन 2 की निरंतरता में देखना चाहिए. अब तक हम संपूर्ण लॉकडाउन के दौर में थे. तीसरे चरण के लॉकडाउन में सरकार ने दो चीज़ों को जोड़ने की कोशिश की है. एक तरफ़ कुछ समाजिक और आर्थिक ज़रूरतों को पूरा करने की एक कोशिश की गई है. ग्रीन ज़ोन और ऑरेंज ज़ोन में जहां बीमारी कंट्रोल में है वहां काम शुरू हो, फ़ैक्टरी शुरू की जाए. दूसरी तरफ़ रेड ज़ोन के कुछ इलाक़े में लॉकडाउन जारी भी है. इसलिए लॉकडाउन फेज 3 एक सोची समझी रणनीति के तहत किया है, जहां पूर्ण लॉकडाउन की बंदिशों को थोड़ा कम किया गया है, कुछ इलाक़ों में ढील दी गई है और कुछ में लॉकडाउन जारी है.”

भारत में लोगों ने अब तक तीन लॉकडाउन देखा है. 23 मार्च से लॉकडाउन का पहला चरण 21 दिन के लिए लागू हुआ था. फिर 15 अप्रैल से लॉकडाउन का दूसरा चरण लागू हुआ और 3 मई से लॉकडाउन का तीसरा चरण लागू हो गया है, जो 17 मई तक चलेगा.

हर बार लॉकडाउन की तारीख़ ख़त्म होते ही सरकार एक नई तारीख़ ले कर सामने आ रही है. ऐसे में हमने भी सरकार के अहम रणनीतिकार से सीधे सवाल किया – लॉकडाउन 4 की स्थिति नहीं आएगी क्या? क्या ये कहने की स्थिति में अब वो हैं?

डॉ. पॉल ने सीधे शब्दों में जवाब दिया, “ये बिल्कुल नहीं कहा जा सकता इस स्टेज में. ये फ़ैसला जब भी किया जाएगा उसके पहले लॉकडाउन 3 का मूल्यांकन किया जाएगा. देखा जाएगा कि पिछले फ़ैसले से हमें क्या फ़ायदा मिला, कोई नुक़सान तो नहीं हुआ. ये भी देखा जाएगा कि जब रिलैक्स करते हैं लॉकडाउन को, तो क्या जनता बाक़ी निर्देशों का अच्छी तरह से पालन करती है. एक सोसाइटी के तौर पर हम उसे निभा पा रहे हैं क्या?”

उनके मुताबिक़ हमें टाइट रोप वॉकिंग करनी है. बहुत क्रिटिकल तरीक़े से काम करना है ताकि जान भी बचे और आर्थिक गतिविधियां भी चलाई जा सके. इसी के आधार पर तय होगा लॉकडाउन आगे बढ़ेगा या नहीं.”

उनके इस बयान को दो संदर्भ में देखने की ज़रूरत है. एक संदर्भ है सोमवार को शराब की दुकानों के बाहर जिस तरह से सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां उड़ी. साफ था, शराब की दुकान खुलते ही लोगों के अंदर से कोरोना का खौफ़ ग़ायब सा दिखा. कई जगहों पर दुकानें समय से पहले बंद कर दी गई. कई राज्यों ने एक ही दिन में 40 दिन से बंद कमाई के ज़रिए तलाश लिए और पिछले सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए.

दूसरा संदर्भ हैं, पिछले 7 दिन में भारत का बढ़ता कोरोना ग्राफ़. पिछले सात दिन में हर दिन तकरीबन 1500 से ज्यादा कोरोना पॉज़िटिव मामले बढ़े हैं. पिछले तीन दिनों में 2000 से ज्यादा नए मामले सामने आ रहे हैं. ऐसे में लॉकडाउन3 में सोशल डिस्टेंसिंग जनता नहीं रख पाएगी, तो इसका सीधा असर देश के कोरोना ग्राफ़ पर ही पड़ेगा.

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